चौक पर चाय पीते मिले एक नेता जी ,
मैनें पूछा कैसे करते आप राजनीति हैं ।
कभी गाली देते कभी गले मिल जाते हम ,
बुझ नहीं पाते यह कैसी राजनीति है ।।
छूटते हीं नेता बोलें अब इस जमाने में ,
अपनी परिभाषा बदली राजनीति है ।
समय को समझ के रंग जो बदल लेता ,
वही सही नेता और सही राजनीति है ।।
अनगढ़
मैनें पूछा कैसे करते आप राजनीति हैं ।
कभी गाली देते कभी गले मिल जाते हम ,
बुझ नहीं पाते यह कैसी राजनीति है ।।
छूटते हीं नेता बोलें अब इस जमाने में ,
अपनी परिभाषा बदली राजनीति है ।
समय को समझ के रंग जो बदल लेता ,
वही सही नेता और सही राजनीति है ।।
अनगढ़
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