करगिल युद्ध के समय की एक छंद आपको सौंप रहा हूँ : -
सुन सुन पाकिस्तान जनि कर परेशान ,
दादा के दालान नाहीं बुझ करगिल के ।
करि के तू शोर जोर केतनो लगईब ,
पइब ना जमीन बराबर एक तील के ।।
तोहरो टिराही हरजोताही सही जाइला ,
सोचिला कि टूकड़ा तू हव एही दिल के ।
गुड़ेरब जे आँख टूट जाई तोहार पाँख ,
बड़ लोग के संगे रहल जाला मिल के ।।
अनगढ़
सुन सुन पाकिस्तान जनि कर परेशान ,
दादा के दालान नाहीं बुझ करगिल के ।
करि के तू शोर जोर केतनो लगईब ,
पइब ना जमीन बराबर एक तील के ।।
तोहरो टिराही हरजोताही सही जाइला ,
सोचिला कि टूकड़ा तू हव एही दिल के ।
गुड़ेरब जे आँख टूट जाई तोहार पाँख ,
बड़ लोग के संगे रहल जाला मिल के ।।
अनगढ़
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