बिहार के गरीब जनता के नेता लालु जी ,
गरीबों के हक हेतु लड़ते लड़ाई हैं ।
आशीर्वाद गरीबों का मिला भरपूर इन्हे ,
सत्ता सुख पाया और धन भी कमाई है ।।
बेटा बेटी हेतु लालु धन का जुगाड़ किए ,
अपने लिए न कहीं रखें एक पाई हैं ।
बड़ी दुख सह कर लालु ने कमाया धन ,
पशु चारा पूरे परिवार को खिलाई है ।।
कितनी तपस्या किए तब है कमाया धन ,
किसी को न वह दिन पड़ता दिखाई है ।
धन की कमी से अब बेटा बेटी हो न दुखी ,
कुछ शहरों में घर मॉल बनवाई है ।।
भैस को चराते हुए बचपन बिता जब ,
किसी ने न देखा दुख कितना उठाई है ।
दुख में बिताए दिन भूल नहीं जाए कभी ,
इसीलिए उम्र भर पशु चारा खाई है ।।
राजनीति करते हैं इसीलिए लोग सभी ,
किसी और धंधा में न इतना कमाई है ।
जनता पे कभी नहीं करते भरोसा नेता ,
सत्ता सुख देती कभी धूल भी चटाई है ।।
कुछ काल में हीं धन इतना जुटा लेते कि ,
फिर से न घिर आए दुख जो उठाई है ।
यही काम लालु किए तो है कुछ दोष नहीं ,
राबड़ी के साथ अब चाटते मलाई हैं ।।
अनगढ़
गरीबों के हक हेतु लड़ते लड़ाई हैं ।
आशीर्वाद गरीबों का मिला भरपूर इन्हे ,
सत्ता सुख पाया और धन भी कमाई है ।।
बेटा बेटी हेतु लालु धन का जुगाड़ किए ,
अपने लिए न कहीं रखें एक पाई हैं ।
बड़ी दुख सह कर लालु ने कमाया धन ,
पशु चारा पूरे परिवार को खिलाई है ।।
कितनी तपस्या किए तब है कमाया धन ,
किसी को न वह दिन पड़ता दिखाई है ।
धन की कमी से अब बेटा बेटी हो न दुखी ,
कुछ शहरों में घर मॉल बनवाई है ।।
भैस को चराते हुए बचपन बिता जब ,
किसी ने न देखा दुख कितना उठाई है ।
दुख में बिताए दिन भूल नहीं जाए कभी ,
इसीलिए उम्र भर पशु चारा खाई है ।।
राजनीति करते हैं इसीलिए लोग सभी ,
किसी और धंधा में न इतना कमाई है ।
जनता पे कभी नहीं करते भरोसा नेता ,
सत्ता सुख देती कभी धूल भी चटाई है ।।
कुछ काल में हीं धन इतना जुटा लेते कि ,
फिर से न घिर आए दुख जो उठाई है ।
यही काम लालु किए तो है कुछ दोष नहीं ,
राबड़ी के साथ अब चाटते मलाई हैं ।।
अनगढ़
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