बेटी

बेटी चलली पिया के गाँव  --2
वन के चिरईंया पिंजड़ा बँधाइल ,
 बदल के आपन नाँव । बेटी .....

ससुरारी में जाके बेटी ,कुल के लाज बचइहs ।
सास , ससुर ,देवर ,ननदी के , दिल से तू अपनइहs  ।।
आपन ओहिजे बसेरा बनइह sजहाँ पिया के पाँव ।
बेटी चलली ....

जेतना पढ़वले बानी ऐहिजा , ओहिजा मोल चुकइह ।
नैहर के उपहार पे बेटी भूल के ना इतरइह  ।।
संभल संभल के बोलिह चलिह बेटी ठाँवे ठाँव ।
बेटी चलली पिया ....

जेतना अन्हरिया करि के  गईलू , ऐ बेटी नैहर में ।
ओतने अँजोरिया  उगइह बेटी , अपने पिया के घर में ।।
जेतने आपन प्यार लूटइबू , ओतने पइबु छाँव ।
बेटी चलली पिया के गाँव .....

अनगढ़

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