आज राज हम यह आपको बताते हैं कि ,
कैसे कोई कवि पाता इतना मुकाम है ।
बिना चोट खाये आता कहीं भी निखार नही ,
चोट सह कर मूर्ति बनते तमाम हैं ।।
पत्नी प्रचंडिका प्रताड़ित करती है तब ,
कवि बनता है कोई यह बात आम है ।
अहो भाग्य मेरा है जो ऐसी पत्नी के कारण ,
लोक नाथ साथ आज अनगढ़ नाम है ।।
अनगढ़
कैसे कोई कवि पाता इतना मुकाम है ।
बिना चोट खाये आता कहीं भी निखार नही ,
चोट सह कर मूर्ति बनते तमाम हैं ।।
पत्नी प्रचंडिका प्रताड़ित करती है तब ,
कवि बनता है कोई यह बात आम है ।
अहो भाग्य मेरा है जो ऐसी पत्नी के कारण ,
लोक नाथ साथ आज अनगढ़ नाम है ।।
अनगढ़
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