बाबा कहकर मुझे कोई भी पुकारता तो ,
छाती छिद जाती आती आँखों से रुलाई है ।
बाबा शब्द सुनते ही कैसा होता हाले दिल ,
वह दृश्य आपको न पड़ती दिखाई है ।।
तन को निहारे नहीं मन मेरा देखें आप ,
उम्र की तनिक नही पड़ी परछाई है ।
ये मेरे काले बाल रंग बदलें हैं जबसे ,
तब से जवानी मेरी और अधिकाई है ।।
अनगढ़
छाती छिद जाती आती आँखों से रुलाई है ।
बाबा शब्द सुनते ही कैसा होता हाले दिल ,
वह दृश्य आपको न पड़ती दिखाई है ।।
तन को निहारे नहीं मन मेरा देखें आप ,
उम्र की तनिक नही पड़ी परछाई है ।
ये मेरे काले बाल रंग बदलें हैं जबसे ,
तब से जवानी मेरी और अधिकाई है ।।
अनगढ़
Comments
Post a Comment