दारु

दारू है बड़ी काम की लोगों ने बदनाम की
गुण इसके कितने हैं इसे पहचानिए ।

सोम रस पान देव लोक में जो करते थे
उसका हीं परिष्कृत रूप इसे जानिए ।

विष्णु जी का साला और लक्ष्मी का भाई है यह
इसी नाते आप अपना मामा इसे मानिए ।

चादर में छिपाकर आदर से ले आइए
बनाइए जाम और जम करके टानिए ।।

बात यदि बनती नहीं हो कार्यालय में तो
घर पर साहब संग पीजिए पिलाइए ।

ग़म की अधिकता दिमाग़ को सताने लगे
दवा रूपी दारू पीकर ग़म भूल जाइए ।।

शादी समारोह में शामिल यदि होते हैं तो
यारों संग बैठकर के जाम टकराइए ।

यदि मर्दानगी पर प्रश्न उठ जाए कभी
एक बार दारू आप ज़रूर आजमाइए ।।

दारू यदि बुरा हीं है सबकी निगाह में तो
पढ़े लिखे लोग किसलिए अपनाते हैं ।

दारू की दुकान नित सजती संवरती है
दूध वाले गली गली फेरे क्यो लगाते हैं ।।

दारू के ख़िलाफ़ महिलाओं की आवाज़ सुनी
पुरुष आवाज़ कभी सुन नहीं पाते हैं ।

सारा हीं समाज आज दारू हीं के पक्ष में है
इसीलिए ``अनगढ़ ´´ दारू गुण गाते हैं ।।

लोक नाथ तिवारी`` अनगढ़ ´´

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