सुनिला कि नाहीं तोहरा घरवा दुआर बाटे ।
कहाँ रखिब गउरा हमार ए भोला पहुना ।
सुनिला कि बरधा के करेल सवारी हो ।
भंगिया पिएल बेसुमार ,ए भोला पहुना ।।
सुनिला कि भुतवा परेत संगे घुमेल ।
पहिरे ल सँपवा के हार ए भोला पहुना ।।
सुनिला कि तंगी में रहेल अड़भंगी हो ।
कइसे चलइब परिवार ए भोला पहुना ।।
कहे लोक नाथ सुन सुन साली सरहज हो ।
लीला ह इनकर अपरम्पार ए भोला पहुना ।।
कहाँ रखिब गउरा हमार ए भोला पहुना ।
सुनिला कि बरधा के करेल सवारी हो ।
भंगिया पिएल बेसुमार ,ए भोला पहुना ।।
सुनिला कि भुतवा परेत संगे घुमेल ।
पहिरे ल सँपवा के हार ए भोला पहुना ।।
सुनिला कि तंगी में रहेल अड़भंगी हो ।
कइसे चलइब परिवार ए भोला पहुना ।।
कहे लोक नाथ सुन सुन साली सरहज हो ।
लीला ह इनकर अपरम्पार ए भोला पहुना ।।
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