माई

माई

संबंध सब खास होला जगहा पर अपना ,
      घर में के होखे चाहे होखे पहुनाई के ।
लड़िका सयान होखे बुढ़ऊ पुरान होखे ,
        सबके राखिला हम दिल में बसाई के ।।
केहु से ना कम हम बुझीला केहु के कबो ,
         सबसे मिलिला हम बहुते धधाई के ।
मतिया मराईल बा हेराईल बा रहिया ,
        जहिया ले साथ छूट गईल बा माई के ।।

भरल परिवार बाटे हितई अपार बा ,
       तबो एगो माई बिना कुल्हिए फुसार बा ।
चउका में बनल बाटे छत्तीस पकवान,
       तनिका निमक बिना सबहीं बेकार बा ।।
केतनो मनाई हम मन नाहीं मानत बा ,
      माई बिना मन नाहीं लागत हमार बा ।
टहटह अँजोरिया उगल बाटे घर में ,
        माई बिना मनवा के कोनवा अन्हार बा ।।

जगहा माई के अब केहु नाहीं पाई ईहाँ ,
       माई माई कही जबे तबे गोहराईला ।
अचका में मन परे कबो जबो माई तब ,
       छतिया मलिला साथे लोर ढ़रकाईला ।।
सपना में देखीं हम जब जब माई के त ,
        झटका से उठी पुका फार नरियाईला ।
सबहीं भरल बाटे घर बन अनगढ़ ,
       माई बिना अकसर अपना के पाईला ।।

लोक नाथ अनगढ़

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