मुकरियाँ


- सँझहीं आके जालन कबो, भोरहरिया में आवेलन ।
आधी रात में आवस कबो ,पूरा रात बितावेलन।
गायब हो जालन कबो ,इहे बा उनकर धंधा ।
ए सखि साजन ! ना सखि चँदा ।


2- कबो ऐने कबो ओने ,दिन भर उ माकेलन ।
    गारी सुनस भा लाठी खास ,सगरो घुस के                   झाँकेलन ।।
   उनका से बतिआवे में , केहु न पावे पार ।
  ए सखि साजन ! ना सखि पत्रकार ।।


3- डँरवारी के डाँक के ,भोरहरिया में आवेला ।
    अपने आवे के धमक से, हमरा के जगावेला ।।
ओकरे से हम जानिला , देश दुनिया के समाचार ।
ए सखि  साजन ! ना सखि अखबार ।।


  4-  नकिअवले बा एतना कि ,सुध बुध      भुलाईल बा ।
    जिअल भार भईल बा अब , जिनिगी से जी अकुलाईलबा ।।
मन करत बा लईकन के , खिया के ज़हर खाई ।
ए सखि साजन ! ना सखि महँगाई ।।


5  संगे लेके घुमिला ,ओकरा के हम शान से ।
    सुटूर सुटूर बतिआवेला , सटके हमरा कान से ।।
हमसे झटसे कहि देला , केवनो खब़र जे आईल ।
ए सखि साजन ! ना सखि मोबाईल ।।


6 - ओकरा सोझा बईठके ,घंटो ओके निहारिला।
ओकर करतब देखके ,सब कुछ ओ पे वारिला ।।
बड़ी सुख देबेला उ , रात दिन हर सीजन ।
ए सखि साजन ! ना सखि टेलीविजन ।।


7- कब आई कब आई ,इहे सोच के हम अकुलाईला ।
आवत के जे देख लिहींला , बड़ी खुश हो जाईला ।।
आँखि के सोझा खाड़ देखके , फ्रेश हो जाला ब्रेन ।
ए सखि साजन ! ना सखि ट्रेन ।।


 8 -बड़ी निक लागेला उनकर ,बोली अउरी तेवर ।
दुसरे बदे बरल करेलन ,उ धुरी में जेंवर ।।
उनका सोझा ना चलेला , केहु के अकील ।
ए सखि साजन ! ना सखि वकील ।।


9  उनका ओरी देख देख के , सबके मन ललचेला ।
जालन जेकरा पंजरा ,उ बड़ी घघचेला ।।
केकरो में ना देखलीं, ताकत उनका जइसा ।
ए सखि साजन ! ना सखि पइसा ।।


10- सकपका जाला सभे ,जसहीं परेला नज़र ।
धकपक मनवा करेला , परेला देह पे बजर ।।
मँगला पे जे ना दिही त , उनका के घसिटी ।
ए सखि साजन ! ना सखि टी टी ।।


11– ओकरा अवते बड़ बड़ सेर , बनि जाला सियार ।
गदहो के बाप कहेला , करेला झुक के नमस्कार।।
गदहवो मौका ताड़ के , खाला खुबिए भाव ।
ए सखि साजन ! ना  सखि चुनाव ।।


12- उहे बा कि हमरा के , सुघर संसार देखावेला ।
कबो कुछो पढ़वावेला , कबो कुछो लिखवावेला ।।
सफर के साथी होला उ , रेल मा भा बस मा ।
ए सखि साजन ! ना सखि चश्मा ।।


13 - जेकरा भिरी रहेला , ओकर मान बढ़ावेला ।
जेकरा भिरी ना रहे त , ओकरा के तरसावेला ।।
सब अछइत ओकरे बिना , करेजा सबके खउलत ।
ए सखि साजन ! ना सखि दउलत ।।


14  एतना ताकत बा ओकरा में , बड़ बड़ लोग झुक जाला ।
मालामाल करे केहु के , केहु के देवाला ।।ओकरा आगे केहु ना ठहरे , मारेला जब चोट ।
ए ,सखि साजन ! ना,सखि नोट ।।


15- साँझ सबेरे जबे तबे, सब ओकरा के जोहेला ।
आँखि के आगा आ जाला त , सबके मन के मोहेला ।।
ओकरा बिना एको दिना , हमरा रहल न जाय ।
ए सखि साजन ! ना सखि चाय ।।


16 जबले उ दुआर पर रही, घर में केहु आई ना ।
बर्तन बासन गहना गुरिया , टकसी एको पाई ना ।।
ओकरा बिना कइसे कतहुँ , जाईं नाहीं बुझाला ।
ए सखि साजन ! ना सखि ताला ।।

17- रात भर जागल , भिनुसहरे आँख मुँदाइल ।
जेतना सनेह भरल रहे , बूँदे बूँद ओराइल ।।रोज राती के हमरा खातिर , जरावे आपन जिया ।
ए सखि साजन ! ना सखि दिया ।।

18 - कबो देला दुख उहे , देला कबो सुख ।
केहु नाहीं जाने कब , केने बदली रुख ।।
कबो लउके लाल उजर ,होला कबो करिया ।
ए सखि साजन ! नाहीं बदरिया ।।

19- ई दइया निरदइया , बहुते हमे सतावेला ।
रोज राति के आके , हमरा के किकुरावेला ।।पँजरा आवे जसहीं तसहीं , काँपे लागे हाड़ ।
ए सखि साजन ! ना सखि जाड़ ।।

20 - केहु के जीवन , मरन केहु के भाखेला ।
केहु के उतारे पगरी , मोंछ केहु के राखेला ।।
केहु के भिखारी ,बनावे केहु के दानी ।
ए सखि साजन ! ना सखि पानी ।।


कुछ लड़को के तरफ से ..........

21 - बहुते दुख उठवलीं हम , जबले ओकर साथ धराइल ।
ओकरे कारन खेत बधार , अउर हमार घर बार बेंचाइल ।।
तबो ना छोड़लीं ओकर साथ , छूट गईल भले मेहरारु ।
ए गोंइया गोरकी ! ना गोंइया दारु ।।

22 - ओकरा फेरा में फँस के , फूँक दिहलीं हम दउलत ।
खाली हो गईल हाथ हमार , करेजा बाटे खउलत ।।
ओकरे कारन देहियों के, बिगड़ल बाटे दासा ।
ए गोंइया गोरकी ! ना गोंइया नाशा ।।

23 - जेने उ चलेले , ओने उठ जाला तुफान ।
जान बचावे केहु के , केहु के लेले जान ।।
घाव करेले जेतना ,ओतना नाहीं करी बल्लम ।
ए गोंइया गोरकी ! ना गोंइया कलम ।।

24 - आवेले त दुख देले , जाले जसहीं होला अन्हार ।
लड़ेले त प्यार करेले ,गुँड़ेरे त होला तकरार ।।
तिरछी ताके जसहीं तसहीं , फरके मन के पाँख ।
ए गोंइया गोरकी ! ना गोंइया आँख ।।

25 संगे ओकरा बईठीला ,त आवेला उन्घाई ।
इहे मन करेला कि , मुँह फेर सुत जाईं ।।
बाकिर संगे ना बइठब त , दुसर मिली खिताब ।
ए गोंइया गोरकी ! ना गोंइया किताब ।।

26 - जबले ओकरा फेरा में पड़लीं , पातर भइल दिन ।
रसगुल्ला खियाइला , काढ़ काढ़ के रिन ।।
देख ! ओकरा कारन अबही , केतना बिपत घहरी ।
ए गोंइया गोरकी ! ना गोंइया कचहरी ।।

27- केतने पापड़ बेलनी हम , तब जाके मिलल ।
हमरा जीवन के गड़ही में , सुघर कुँइया खिलल ।।
ओकरा अवते भर गईल , संबंधन के टोकरी ।
ए गोंइया गोरकी ! ना गोंइया नोकरी ।।

28 - सँउसे संसार में घुमि घुमि , बघारब केतनो सेखी ।
ओकरा रहते हमरा के ,घिरना से सभे देखी ।।जबले रही चिढ़ाई सभे , हमरा के लिबी लिबी ।
ए गोंइया गोरकी ! ना गोंइया गरीबी ।।


29 - ओकरे मुँह देख के , रोज सबेरे जागिला ।
ओकरे मुँह देख के , रोज काम पे लागिला ।।
जहिया उ बिगड़ जाले , अकाज होला बड़ी ।
ए गोंइया गोरकी ! ना गोंइया घड़ी ।।

30 - कहे सुने में निमन लागे , चर्चा ओकर चलाइला ।
आवेला जब मौका , ओकरा पँजरा ना जाइला ।।
ओकर गुन गाईंला , निभाईंला दुसरे संगे इयारी ।
ए गोंइया गोरकी ! ना गोंइया ईमानदारी ।।

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