>>>>>कुल बोरन<<<<<
1,बचवा के हालचाल हमरा से पुछी मत,गत बनल बाटे गतरी के ई बुढ़ारी में ।
फुकलस बड़ी धन लागल ना पढ़े मे मन,बेच आईल बाटे दिमाग़ के कबाड़ी में ।।
गरू के गवत सानी नाहीं करे गोबर पानी,गाना सुने रेडियो के लेके अँकवारी में।
सीत होखे चाहे घाम दिने -राती करीं काम,बचवा हमार सुतल रहेला अँटारी में।।
2,मेहरी के मुँह मउगा घरहीं निरेखेला ,देखेला ई नाहीं घर के बहरी के काम के।
नुन तेल लकड़ी के करे ना फिकिर कबो,दिन भर ढ़ोवेला ई मेहर के सजाम के।।
मेहरी के बात दिन रात सुने हर हर,घर भर से नाता अब बाटे बस नाम के।
मेहरी के आगा मेड़र मार के ई रहेला ,कहेला कि पुन पावत बानी चारूधाम के।।
3,पहिले जमाना मर्दाना लोग दलानी रही,बीजे के बैरी बखरी में संगे सब जइहें।
ठहर पोतनहर से लिपात रहे रचके,पीढ़ा पे बईठ के सवाँग संगे खइहें।।
बान्ही के लंगोटा सोंटा काँखी तर दबाई के,पहुँचीहें अखाड़ा केहु खेत घुमे जइहें।
छठवा छमासे घरे चोर अस जाई सभे,कब गईली अईली केहु ना जान पईहें।।
4,मेहरी के घरे में दलान अब बनल बा,खटिये पर खाना खाला मेहरी के थारी में।
घर के ईजत हमार देवढ़ी हेलवलस,मेहरी के संगे लेके घुमेला बजारी में।।
फुफा मउसा मामा गाँवे जाला ना भुलइलो ,तिसरिये घुमेला सढुआने ससुरारी में।
केतना ले कहींअब `अनगढ़´जान ल कि,कुल के ईजत बाबू बोर देलस नारी में।।
(बेटा के जवाब)
5,बाबूजी हमार सुन कान के पसारअब,चुपचाप रहले में बाटे तोहरा फायदा ।
पहिले जमाना के तू बात बतिआवल छोड़,नयेका जमाना के तू सिख अब कायदा।।
आँख कान मुँह बंद करिके जे रखिब त,देह आ दिमाग़ चुस्त रही बिना बैदा।
देश के मुताबिक़ भेस अपनाव बाबूजी तू,सरवन कुमार अब नाहीं लिहें पैदा।।
1,बचवा के हालचाल हमरा से पुछी मत,गत बनल बाटे गतरी के ई बुढ़ारी में ।
फुकलस बड़ी धन लागल ना पढ़े मे मन,बेच आईल बाटे दिमाग़ के कबाड़ी में ।।
गरू के गवत सानी नाहीं करे गोबर पानी,गाना सुने रेडियो के लेके अँकवारी में।
सीत होखे चाहे घाम दिने -राती करीं काम,बचवा हमार सुतल रहेला अँटारी में।।
2,मेहरी के मुँह मउगा घरहीं निरेखेला ,देखेला ई नाहीं घर के बहरी के काम के।
नुन तेल लकड़ी के करे ना फिकिर कबो,दिन भर ढ़ोवेला ई मेहर के सजाम के।।
मेहरी के बात दिन रात सुने हर हर,घर भर से नाता अब बाटे बस नाम के।
मेहरी के आगा मेड़र मार के ई रहेला ,कहेला कि पुन पावत बानी चारूधाम के।।
3,पहिले जमाना मर्दाना लोग दलानी रही,बीजे के बैरी बखरी में संगे सब जइहें।
ठहर पोतनहर से लिपात रहे रचके,पीढ़ा पे बईठ के सवाँग संगे खइहें।।
बान्ही के लंगोटा सोंटा काँखी तर दबाई के,पहुँचीहें अखाड़ा केहु खेत घुमे जइहें।
छठवा छमासे घरे चोर अस जाई सभे,कब गईली अईली केहु ना जान पईहें।।
4,मेहरी के घरे में दलान अब बनल बा,खटिये पर खाना खाला मेहरी के थारी में।
घर के ईजत हमार देवढ़ी हेलवलस,मेहरी के संगे लेके घुमेला बजारी में।।
फुफा मउसा मामा गाँवे जाला ना भुलइलो ,तिसरिये घुमेला सढुआने ससुरारी में।
केतना ले कहींअब `अनगढ़´जान ल कि,कुल के ईजत बाबू बोर देलस नारी में।।
(बेटा के जवाब)
5,बाबूजी हमार सुन कान के पसारअब,चुपचाप रहले में बाटे तोहरा फायदा ।
पहिले जमाना के तू बात बतिआवल छोड़,नयेका जमाना के तू सिख अब कायदा।।
आँख कान मुँह बंद करिके जे रखिब त,देह आ दिमाग़ चुस्त रही बिना बैदा।
देश के मुताबिक़ भेस अपनाव बाबूजी तू,सरवन कुमार अब नाहीं लिहें पैदा।।
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