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गंगा माँ करती है पुकार ,सुन ले बाबू मेरी गुहार ।
मेरी रक्षा नहीं करोगे ,तो इक दिन पछताओगे ।।
मेरी रक्षा नहीं करोगे ,तो इक दिन पछताओगे ।।
1•ब्रह्म कमंडल से चल करके ,धरती पर जब आई थी ।
झूम उठा था पर्वत मंडल,वन में बजी बधाई थी ।।
जहाँ जहाँ से जाती गंगा ,निर्मल करती जाती थी ।
दर्शन परसन करते जो भी ,उनका पुण्य बढ़ाती थी ।।
मैं सोची थी युगों युगों तक ,मेरी गाथा गाओगे ।
मेरी रक्षा ……
झूम उठा था पर्वत मंडल,वन में बजी बधाई थी ।।
जहाँ जहाँ से जाती गंगा ,निर्मल करती जाती थी ।
दर्शन परसन करते जो भी ,उनका पुण्य बढ़ाती थी ।।
मैं सोची थी युगों युगों तक ,मेरी गाथा गाओगे ।
मेरी रक्षा ……
2• पर यह मानव माँ गंगा को , मान नहीं वह दे पाया ।
निज कर्मों से माँ गंगा के ,दामन में दाग़ लगाया ।।
बेटा कहलाने का हक़ तो ,मानव ने खूब निभाया ।
देव नदी के पावन जल में , नालों का नीर बहाया ।।
नहीं पताथा अपनी माँ को ,इतना तुम तड़पाओगे ।
मेरी रक्षा ……
निज कर्मों से माँ गंगा के ,दामन में दाग़ लगाया ।।
बेटा कहलाने का हक़ तो ,मानव ने खूब निभाया ।
देव नदी के पावन जल में , नालों का नीर बहाया ।।
नहीं पताथा अपनी माँ को ,इतना तुम तड़पाओगे ।
मेरी रक्षा ……
3• इसी तरह गंगा जल को हम ,गंदा करते जाएंगे ।
फिर बोतल में भर गंगा जल ,घर को कैसे लाऐंगे ।।
अभी समय है चेत मनुज तू ,वर्ना वह दिन आएगा ।
गंगा जल के दरस परस को , तरस तरस रह जाएगा ।।
भोले बाबा के सिर पर,इस जल को कैसे चढ़ाओगे ।
मेरी रक्षा ……
फिर बोतल में भर गंगा जल ,घर को कैसे लाऐंगे ।।
अभी समय है चेत मनुज तू ,वर्ना वह दिन आएगा ।
गंगा जल के दरस परस को , तरस तरस रह जाएगा ।।
भोले बाबा के सिर पर,इस जल को कैसे चढ़ाओगे ।
मेरी रक्षा ……
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