पत्नी


चढ़ती दुपहरी सी तेवर हो किसी के भी,
पत्नी के पास आते हो जाता वह शाम है ।
इनके आँखों में वह आग है धधकती कि ,
बड़े बड़े शुरमा की बुद्धि होती जाम है ।।
पत्नी प्रचंडिका प्रताडित करती है तब ,
कवि बनता है कोई यह बात आम है ।
अहो भाग्य मेरा है जो ऐसी पत्नी के कारण ,
लोक नाथ साथ आज अनगढ़ नाम है ।।

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