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टेलिविजन
1• सरकार बेकार रहे देत नारा ,
सारा समाज सुधारी ई टी वी ।
लछन एकर इहे देखाता कि ,
सउसे समाज बिगाड़ी ई टी वी ।।
कान से सुनले रहीं ना जवन ,
तवन आँखिन देखावता टी वी ।
संस्कृति पूरब के बा मिटावत ,
बनावता पश्चिम के ई करीबी ।।
सारा समाज सुधारी ई टी वी ।
लछन एकर इहे देखाता कि ,
सउसे समाज बिगाड़ी ई टी वी ।।
कान से सुनले रहीं ना जवन ,
तवन आँखिन देखावता टी वी ।
संस्कृति पूरब के बा मिटावत ,
बनावता पश्चिम के ई करीबी ।।
2• शिक्षा त दूर के सपना भईल ,
मईल समाज के करता टी वी ।
संगे सभे सब देखत बाटे ई,
बेटी पतोह बेटा मियाँ भा बीबी ।
केहु के मरद मेहर केहु के ,
रोजे मिलावत जुलावता टी वी ।
पसार के रोजे समाज में शंका ,
लंका में आग लगावत बा टी वी ।।
मईल समाज के करता टी वी ।
संगे सभे सब देखत बाटे ई,
बेटी पतोह बेटा मियाँ भा बीबी ।
केहु के मरद मेहर केहु के ,
रोजे मिलावत जुलावता टी वी ।
पसार के रोजे समाज में शंका ,
लंका में आग लगावत बा टी वी ।।
3• लाज लजा के समाज से भागल ,
जागल सगरो बाटे बेहयाई ।
कॉलेज नॉलेज दिही ना ओतना ,
जेतना कि टी वी में रोजे देखाई ।।
ग्यान सयान के रहे ना जवन ,
तवन आजु के लड़िका बताई ।
सोच में पड़ल बाड़न ``अनगढ़´´,
देश के टी वी कहा पहुँचाई ।।
जागल सगरो बाटे बेहयाई ।
कॉलेज नॉलेज दिही ना ओतना ,
जेतना कि टी वी में रोजे देखाई ।।
ग्यान सयान के रहे ना जवन ,
तवन आजु के लड़िका बताई ।
सोच में पड़ल बाड़न ``अनगढ़´´,
देश के टी वी कहा पहुँचाई ।।
मोबाइल
1• नवहन के हाथ में मोबाइल के अवते ,
छवते हीं जाता ऐकर रोजे प्रभाव हो ।
रोजे खरिदात बाटे सिमवा रिचार्ज देख ,
घरवा में होखे भले आटा के अभाव हो ।।
एयर टेल फेल होखे नाहीं घाटा टाटा के ,
रोजहीं रिलायंस करेला काँव काँव हो ।
कंपनी के बाजे बाजा माजा आवे बचवा के ,
बाबूजी के बदे बाटे कपरा के घाव हो ।।
1• नवहन के हाथ में मोबाइल के अवते ,
छवते हीं जाता ऐकर रोजे प्रभाव हो ।
रोजे खरिदात बाटे सिमवा रिचार्ज देख ,
घरवा में होखे भले आटा के अभाव हो ।।
एयर टेल फेल होखे नाहीं घाटा टाटा के ,
रोजहीं रिलायंस करेला काँव काँव हो ।
कंपनी के बाजे बाजा माजा आवे बचवा के ,
बाबूजी के बदे बाटे कपरा के घाव हो ।।
2 • कपड़ा किरीच वाली पॉकिट न रहे खाली ,
राखेलन हरदम मोबाइल हाथ में ।
होखे ना पढ़ाई भले छतिया फुलाई चले ,
नया स्टाईल के मोबाइल लेके साथ में ।।
मारे कखो मिस किस करे कबो फोनवे से ,
दिनवा से बेसी बात करेला ई रात में ।
अपना मोबाइल में के देखी देखी सीन ,
लीन दिनरात ई रहेलन खुरपात में ।।
राखेलन हरदम मोबाइल हाथ में ।
होखे ना पढ़ाई भले छतिया फुलाई चले ,
नया स्टाईल के मोबाइल लेके साथ में ।।
मारे कखो मिस किस करे कबो फोनवे से ,
दिनवा से बेसी बात करेला ई रात में ।
अपना मोबाइल में के देखी देखी सीन ,
लीन दिनरात ई रहेलन खुरपात में ।।
3 • वाह रे मोबाइल मोरा देशवा में आईल ,
समाइल घरे घर जगहा बनाई के ।
अइसन प्रभाव आपन देखावे लागल ,
पागल भईल बाटे सभे अझुराई के ।।
जिनगी के घाती साथी देह के बनल बाटे ,
केहु रोवे हँसे केहु रोजे गुन गाई के ।
धन्य मोबाइल स्टाइल तोहार धन्य बाटे ,
लेल नमस्कार अब ``अनगढ़´´ भाई के ।।
समाइल घरे घर जगहा बनाई के ।
अइसन प्रभाव आपन देखावे लागल ,
पागल भईल बाटे सभे अझुराई के ।।
जिनगी के घाती साथी देह के बनल बाटे ,
केहु रोवे हँसे केहु रोजे गुन गाई के ।
धन्य मोबाइल स्टाइल तोहार धन्य बाटे ,
लेल नमस्कार अब ``अनगढ़´´ भाई के ।।
मेहरी के जमाना
1 बितले जमाना मर्दानन के राज रहल ,
कहले जे बात साथ देत रहे मेहरी ।
भोजनो बनावत रहे गोड़वो दबावत रहे ,
ढेकुली से धान कुटी भरे घर डेहरी ।।
सहत लात दिन रात बीत जात जिनगी ,
सनगी पे नाचे रोजे बनी कर महरी ।
खुली गईले आँख पाँख जामल सभकर ,
घुघ से निकल के घुमे लागल बहरी ।।
1 बितले जमाना मर्दानन के राज रहल ,
कहले जे बात साथ देत रहे मेहरी ।
भोजनो बनावत रहे गोड़वो दबावत रहे ,
ढेकुली से धान कुटी भरे घर डेहरी ।।
सहत लात दिन रात बीत जात जिनगी ,
सनगी पे नाचे रोजे बनी कर महरी ।
खुली गईले आँख पाँख जामल सभकर ,
घुघ से निकल के घुमे लागल बहरी ।।
2 • अब नाही इन्हकर आस कर भइया कि ,
रतिया में सुतला में मरिहे खरहरा ।
रतिया में सुतला में मरिहे खरहरा ।
छोड़ दिहली चउका चउक पे बईठ के ,
देश दुनिया के अब पढ़िहे ककहरा ।।
रोकले रोकाई नाही बन्हले बन्हाई नाही ,
घरवा के छोड़ गोड़ निकलल बहरा ।
राम के भरोसे हिन्दू होटल के छोड़ अब ,
कब तक देब तुहूँ पीछे पीछे पहरा ।।
देश दुनिया के अब पढ़िहे ककहरा ।।
रोकले रोकाई नाही बन्हले बन्हाई नाही ,
घरवा के छोड़ गोड़ निकलल बहरा ।
राम के भरोसे हिन्दू होटल के छोड़ अब ,
कब तक देब तुहूँ पीछे पीछे पहरा ।।
3• जब आधा अधिकार देले बिया सरकार ,
दरकार नाही बाटे केहु के सलाह के ।
लोहा मनवाई लेली सबके देखाई देली ,
घरे अउरी बहरी के रिश्ता निबाह के ।।
पत्नी के साथे साथे पतियो भी बनी गईली ,
दिल्ली ओरी देखी ल उठाई के निगाह के ।
छोड़ी द घमंड महमंड के नचाव जिन ,
``अनगढ़ ´´ मान अब इनके सलाह के ।।
दरकार नाही बाटे केहु के सलाह के ।
लोहा मनवाई लेली सबके देखाई देली ,
घरे अउरी बहरी के रिश्ता निबाह के ।।
पत्नी के साथे साथे पतियो भी बनी गईली ,
दिल्ली ओरी देखी ल उठाई के निगाह के ।
छोड़ी द घमंड महमंड के नचाव जिन ,
``अनगढ़ ´´ मान अब इनके सलाह के ।।
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