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भारत का सिर किया है ऊँचा ,
सूर वीर इक आया है ।
जन नायक अधिनायक बनकर ,
सबके दिल में छाया है ।।
दिखा दिया दुश्मन को उसने ,
कैसे शान से जीते हैं ।
गले लगोगे गले लगेंगे ,
वर्ना खून भी पीते हैं ।।
करते रार नहीं अपने से ,
ऊँचे कद के लोगों से ।
वर्ना खुद मर जाएगा तू ,
खुद फैलाए रोगो से ।।
सबक़ यही सिखलाया उसको ,
लाल आज इस माटी का।
क़ायम किया मिसाल लाल ने ,
भारत के परिपाटी का ।।
अभी समय है सबक़ मिला है ,
इतने पर रुक जाओगे ।
सच कहता हूँ छोटे भाई ,
मिटने से बच जाओगे ।।
वर्ना मिटना भाग्य में है ,
तो अब तुम मिट जाओगे ।
जिस मिट्टी से जन्म लिया है ,
उसमें हीं मिल जाओगे ।।
लोक नाथ तिवारी`` अनगढ़ ´´
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