सैनिक


न्योछावर जो मातृभूमि पर , 
निज प्राणों की करते है ।
वैसे वीर सपूतो का हम , 
नित अभिनंदन करते हैं ।।
इनके बल पर सबसे ऊँचा , 
भाल है हिन्दुस्तान का ।
रक्षा करते रहते निश दिन ,
आर्यावर्त महान का ।।

2 - घर परिवार त्याग कर अपना ,
सीमा पर ये रहते हैं ।
हम सोते हैं सुख से घर में ,
दुख अनेक ये सहते हैं ।।
हम खेलते रंग से होली ,
इनकी है ख़ूनी होली ।
जब हम खाते नाना व्यंजन ,
तब ये खाते हैं गोली ।।

3 - सर्दी गर्मी वर्षा में हम ,
घर में बैठ बिताते हैं ।
ये सीमा की रक्षा करते ,
तनिक नहीं घबराते हैं ।।
बेटा कहलाने का हक़ तो ,
पूरा यही निभाते हैं ।
मातृभूमि की रक्षा हेतु ,
जीते हैं मर जाते हैं ।।

4- लाखों लोग भूमि पर आते ,
खाते पीते जाते हैं ।
वीर पुत्र है धरती का यह ,
कहाँ किसे कह पाते हैं ।।
यह सौभाग्य मिला है जिनको ,
थोड़े दिन हीं रहते हैं ।
पर जब उनकी अर्थी उठती ,
सबके आँसू बहते हैं ।।

5 - ऐसे हीं वीरों से ,
धरती माँ की रक्षा होती है ।
धरती पर सोता है जब यह ,
धरती माँ भी रोती है।।
इनके यश को गाते गाते ,
आँखों से आँसू आते ।
जितना ऊँचा कद है इनका ,
शब्द नहीं हम दे पाते ।।

6 - भारतमाता के सपूत ये ,
जहाँ कहीं भी जाएंगे ।
मातृभूमि के वीरों के हम ,
पथ में फूल बिछाएंगें ।।
सीमा पर होते शहीद जो ,
अनगढ़ गाथा गाएंगे ।
ऐ वीरों  तेरे चरणों की ,
धूली सिर से लगाएंगे ।।

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