सखी सुनो ! मधुमास आया।
विरहण का है , मन भरमाया।।
स्वप्न सुंदरी सेज सजाये।
साजन मोरे अबहुँ न आये।।
मधुवन मोर के नृत्य मनोहर ।
नीरस लागे, सुन मेरे प्रियवर।।
अमराई में कुहके कोइलिया।
मह मह महके देखो मोजरिया।।
अब न हिय ,सम्हार भई मोरे।
दर्शन हित व्याकुल मैं तोरे।।
प्रिय, सुनो मधुमास आया।
तोरे दरश पा ये मन भाया ।।
विरहण का है , मन भरमाया।।
स्वप्न सुंदरी सेज सजाये।
साजन मोरे अबहुँ न आये।।
मधुवन मोर के नृत्य मनोहर ।
नीरस लागे, सुन मेरे प्रियवर।।
अमराई में कुहके कोइलिया।
मह मह महके देखो मोजरिया।।
अब न हिय ,सम्हार भई मोरे।
दर्शन हित व्याकुल मैं तोरे।।
प्रिय, सुनो मधुमास आया।
तोरे दरश पा ये मन भाया ।।
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