मधुमास

सखी सुनो ! मधुमास आया।
विरहण का है , मन भरमाया।।

स्वप्न सुंदरी सेज सजाये।
साजन मोरे अबहुँ  न आये।।

मधुवन मोर के नृत्य मनोहर ।
नीरस लागे, सुन मेरे प्रियवर।।

 अमराई में कुहके कोइलिया।
मह मह महके देखो मोजरिया।।

अब न हिय ,सम्हार भई मोरे।
दर्शन हित व्याकुल मैं तोरे।।

 प्रिय, सुनो मधुमास आया।
तोरे दरश पा ये मन भाया ।।

Comments