वाजपेयी जी


एक दिन मैने वाजपेयी जी से जाके पूछा ,
आपका विवाह किस कारण  हुआ नहीं ।

सुन्दर सलोना रूप मुसकान है निराला ,
कुँवारापन का दाग़ फिर भी मिटा नहीं ।।

बोले वाजपेयी नाम अनुसार अटल हैं ,
मनोभावना कहीं खुलकर कहा नहीं ।

नदी नहीं आई कोई सागर से मिलने को ,
नदियों की ओर कभी सागर गया नहीं ।।

तब वाजपेयी जी को मैने ये सलाह दिया ,
कुँवारापन का दाग़ अब भी मिटाइए ।

तीन तीन कुँवारियाँ हैं आसपास आपके ,
किसी का माँग भर के पति बन जाइए ।।

बोलें वाजपेयी मुझे माफ़ करें `` अनगढ़ ´´,
सोई हुई भावना को अब न जगाइए ।

जैसे तैसे काट ली है अपनी जवानी सारी ,
अब न बुढ़ापे में लॉलीपॉप दिखाइए ।।

अनगढ़

Comments