पत्नी के तरफ से उत्तर


🌺🌺  पत्नी का उत्तर  🌺🌺

1 - घूँघट के पट के हटते मैंने ,
     आँखें जो खोली तो मन घबराया ।
     अपनी प्रतिमूर्ति सामने देख ,
      कही दैव कैसा तू जोड़ा लगाया ।।
      आँखों का आँखों से नाक का नाक से ,
      दाँतों का दाँतों से ,संगम कराया ।।
      अगुआ को दी मैंने लाखों दुआएँ ,
      सही जगह पे मुझे पहुँचाया ।।


2 - अहो भाग्य मेरा जो आप मिलें  ,
      वरना यह रूप कहाँ लेके जाती ।
       विधाता बनाता है जैसा पुरुष 
       जिसे, वैसी उसे पत्नी मिल जाती ।।
       मिलता मुझे कोई बाँका छबीला,
       रंगीला पति उसे कैसे रिझाती ।
        रुपसी गर आपको मिल जाती ,
        अंगुठा दिखाती हुई चली जाती ।।


3 - मेरे बदौलत पाया जो आपने ,
      दुनिया वालों को कभी न सुनाते ।
      आपके घर में जो मैं नहीं आती ,
       तो वेदना की उपहार न पाते ।।
       वेदना मन को नहीं मिलती तो ,
       कभी नहीं आप कवि बन पाते।
       आपकी कविता में धार न होती ,
       आप नहीं अनगढ़ कहलाते ।।



                               अनगढ़

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